डेली24 भारत डेस्क: भारत में क्रिकेट केवल एक खेल नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा हुआ नाम है। जब किसी चर्चित क्रिकेटर का नाम चुनावी प्रक्रिया से जुड़ जाए, तो मामला स्वाभाविक रूप से सुर्खियों में आ जाता है. ऐसा ही कुछ हुआ भारतीय क्रिकेट टीम के तेज़ गेंदबाज़ मोहम्मद शमी के साथ, जिन्हें पश्चिम बंगाल में चल रहे SIR प्रक्रिया के तहत सत्यापन सुनवाई के लिए बुलाया गया था. इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए, बल्कि राज्य की राजनीति को भी गरमा दिया है.
सोमवार को मोहम्मद शमी को कोलकाता के जादवपुर स्थित एक स्कूल में SIR सत्यापन सुनवाई के लिए उपस्थित होना था. हालांकि, उस समय शमी राजकोट में चल रही विजय हजारे ट्रॉफी में बंगाल की टीम का प्रतिनिधित्व कर रहे थे. व्यावसायिक प्रतिबद्धताओं के कारण शमी उस सुनवाई में शामिल नहीं हो सके. इसके बाद उन्होंने निर्वाचन आयोग से नई तारीखों की मांग की, जिसे स्वीकार कर लिया गया. अब शमी और उनके भाई मोहम्मद कैफ की सुनवाई 9 जनवरी से 11 जनवरी के बीच होगी.
अधिकारियों के अनुसार, शमी और उनके भाई को इसलिए बुलाया गया था क्योंकि उनके द्वारा भरे गए नामांकन फॉर्म में कुछ तकनीकी त्रुटियां पाई गई थी. मोहम्मद शमी कोलकाता नगर निगम के वार्ड 93 के मतदाता हैं, जो रासबिहारी निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आता है. पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने स्पष्ट किया कि यह कोई असाधारण मामला नहीं है और कई मतदाताओं को इसी तरह की त्रुटियों के कारण सत्यापन के लिए बुलाया जाता है.
कोलकाता: क्रिकेटर मोहम्मद शमी को चुनाव आयोग का नोटिस। SIR फॉर्म में गड़बड़ियों के आरोप में शमी तलब। शमी और उनके भाई का जन्म यूपी में, जबकि वोटर बंगाल में। शमी कोलकाता म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन के वॉर्ड 93 में पंजीकृत वोटर हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 2024 लोकसभा चुनाव में शमी ने अमरोहा… pic.twitter.com/B3WzIj6lcT
— Daily 24 Bharat (@Daily24bharat) January 6, 2026
मोहम्मद शमी मूल रूप से उत्तर प्रदेश के निवासी हैं, लेकिन उनका क्रिकेट करियर काफी हद तक कोलकाता और बंगाल से जुड़ा रहा है. बहुत कम उम्र में वह कोलकाता आ गए थे और यहीं रहकर उन्होंने क्रिकेट की बारीकियां सीखीं. बंगाल के पूर्व रणजी कप्तान समबारन बनर्जी के मार्गदर्शन में शमी ने राज्य की अंडर-22 टीम में जगह बनाई और फिर राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे. यही वजह है कि कोलकाता उनके जीवन और करियर का अहम हिस्सा रहा है. लेकिन SIR प्रक्रिया केवल शमी तक सीमित नहीं रही. इस मुद्दे ने राज्य की राजनीति में भी तीखी बहस को जन्म दे दिया है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने SIR के दौरान कथित “अमानवीय आचरण” का आरोप लगाते हुए कहा है कि वह इस मामले को अदालत तक ले जाएंगी. दक्षिण 24 परगना जिले के सागर द्वीप में एक जनसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने दावा किया कि इस प्रक्रिया से जुड़े भय, उत्पीड़न और प्रशासनिक मनमानी के कारण कई लोगों की मौत हुई है और कई अन्य को अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है.
ममता बनर्जी का आरोप है कि 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने की साजिश की जा रही है. उनके अनुसार, SIR की आड़ में गरीब, प्रवासी और हाशिए पर रहने वाले लोगों को डराया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र पर हमला करार दिया. वहीं, बीजेपी ने ममता बनर्जी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. बीजेपी नेताओं का कहना है की मुख्यमंत्री अदालत जाने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन वह उन “घुसपैठियों” की रक्षा नहीं कर पाएंगी जिन्हें पार्टी टीएमसी का मुख्य वोट बैंक बताती है. बीजेपी का दावा है कि SIR प्रक्रिया का उद्देश्य केवल मतदाता सूची को शुद्ध और पारदर्शी बनाना है, न कि किसी को डराना या मताधिकार से वंचित करना.
मोहम्मद शमी का मामला भले ही तकनीकी त्रुटियों और तारीखों के टकराव तक सीमित हो, लेकिन SIR को लेकर उठा विवाद कहीं ज्यादा व्यापक और गंभीर है. एक ओर प्रशासन इसे नियमित प्रक्रिया बता रहा है, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दे रहा है. आने वाले दिनों में अदालत, चुनाव आयोग और राजनीतिक दलों की भूमिका यह तय करेगी कि यह विवाद कैसे सुलझता है. फिलहाल इतना तय है कि क्रिकेट के मैदान से लेकर सियासत के मंच तक, SIR का मुद्दा पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय तक गूंजता रहेगा.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर