Daily 24 भारत डेस्क: दिल्ली-NCR में लगातार बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने बड़ा और कड़ा कदम उठाया है. राजधानी में हवा की गुणवत्ता बहुत खराब स्तर पर पहुंच चुकी है और इससे न केवल आम लोगों की सेहत प्रभावित हो रही है, बल्कि रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी असर पड़ा है. दिल्ली सरकार ने बुधवार को घोषणा की कि गुरुवार से दिल्ली के सभी सरकारी और निजी संस्थानों में 50 प्रतिशत कर्मचारियों के लिए वर्क फ्रॉम होम अनिवार्य होगा. यह फैसला प्रदूषण के स्तर को कम करने और सड़कों पर वाहनों की संख्या घटाने के उद्देश्य से लिया गया है. नियमों का उल्लंघन करने वाले संस्थानों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा.
सरकारी घोषणा के अनुसार, ग्रेप-3 नियमों के तहत निर्माण कार्यों पर लगी रोक के कारण प्रभावित हुए रजिस्टर्ड निर्माण मजदूरों को भी राहत दी जाएगी. श्रम विभाग ने बताया कि ग्रेप-3 अवधि के दौरान 16 दिन तक निर्माण कार्य बंद रहने से प्रभावित मजदूरों को दिल्ली सरकार सीधे उनके बैंक खातों में 10,000 रुपये का मुआवजा देगी। यह राहत ग्रेप-4 के दौरान भी उसी आधार पर दी जाएगी. इस निर्णय से लाखों मजदूरों को वित्तीय मदद मिलेगी और उनकी दैनिक जरूरतों को पूरा करने में आसानी होगी.
दिल्ली के कई इलाकों में AQI आज 350 के पार,हवा की गुणवत्ता ‘बेहद खराब’ श्रेणी में दर्ज।@AQI_India #Delhi #AirPollution #AQIAlert pic.twitter.com/rJwVRTUl2A
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दिल्ली का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) बुधवार को 329 पर रिकॉर्ड किया गया, जो ‘बहुत खराब’ श्रेणी में आता है. हालांकि, पिछले तीन दिनों से राजधानी में छाए घने स्मॉग और गंभीर प्रदूषण में कुछ सुधार देखा गया है। सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) के मुताबिक, राजधानी के सभी मॉनिटरिंग स्टेशनों पर सुबह 7 बजे AQI गंभीर स्तर से नीचे था, जबकि कुछ इलाकों में यह ‘खराब’ श्रेणी में दर्ज किया गया. तेज हवाओं और कम कोहरे की वजह से मंगलवार को प्रदूषण का स्तर गंभीर श्रेणी से बाहर आ गया था.
CPCB के अनुसार, AQI के 0-50 अंक को ‘अच्छा’, 51-100 को ‘संतोषजनक’, 101-200 को ‘मध्यम’, 201-300 को ‘खराब’, 301-400 को ‘बहुत खराब’ और 401-500 को ‘गंभीर’ माना जाता है. पिछले कुछ दिनों में राजधानी में घने धुंध और स्मॉग के कारण हवाई और सड़क परिवहन सेवाओं पर काफी असर पड़ा। कई फ्लाइटें रद्द हुईं और सड़क दुर्घटनाओं में बढ़ोतरी हुई. हालांकि, बुधवार सुबह प्रदूषण का स्तर काफी हद तक नियंत्रित हो गया.
भारत मौसम विज्ञान विभाग ने दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में मध्यम कोहरे का अनुमान जताया है. इसके साथ ही अधिकतम तापमान 24 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस रहने का पूर्वानुमान है. दिल्ली में अभी तक शीतलहर का अनुभव नहीं हुआ है, और जिस तरह की सर्दी के लिए यह शहर प्रसिद्ध है, वह अभी नहीं आई है. राजधानी में दिखाई दे रहा कोहरा मुख्य रूप से बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण था.
बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए दिल्ली सरकार ने GRAP IV को प्रभावी कर दिया है. यह प्रदूषण पर सबसे सख्त पाबंदियों का सेट है. इसके तहत निर्माण कार्यों पर रोक, वाहनों की संख्या कम करना और औद्योगिक गतिविधियों पर नियंत्रण जैसे कड़े कदम शामिल हैं. इसके अलावा सरकार ने घोषणा की कि पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं रखने वाले वाहनों को ईंधन नहीं दिया जाएगा और BS-VI मानक से नीचे वाले गैर-दिल्ली वाहनों का प्रवेश भी प्रतिबंधित किया जाएगा.
दिल्ली में प्रदूषण का कहर! … 50% वर्क फ्रॉम होम अब अनिवार्य @AQI_India #Delhi #AirPollution #AQIAlert pic.twitter.com/kgkm3Fwpxb
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विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली-NCR में प्रदूषण का मुख्य कारण बढ़ती औद्योगिक गतिविधियां, वाहनों की संख्या में इजाफा, ठोस ईंधन का उपयोग और जमीनी धूल है. इन कारणों के साथ-साथ मौसम में बदलाव और कोहरे की स्थिति प्रदूषण को बढ़ा देती है. दिल्ली सरकार के कड़े कदम और आम जनता की भागीदारी ही इस गंभीर समस्या से निजात दिला सकती है.
यह स्पष्ट है कि दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण अब केवल मौसमी समस्या नहीं रही, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है. दिल्ली सरकार द्वारा उठाए गए वर्क फ्रॉम होम, निर्माण कार्यों पर रोक और सख्त वाहनों के नियम इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं. अब यह जरूरी है कि नागरिक भी प्रदूषण कम करने में सहयोग करें और अपनी दिनचर्या में बदलाव लाएं, ताकि राजधानी में सांस लेना फिर से सुरक्षित और स्वच्छ हो सके.