डेली24भारत डेस्क: दिल्ली-एनसीआर में लगातार बिगड़ती वायु गुणवत्ता को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर रुख अपनाया है। सोमवार को अदालत ने स्पष्ट किया कि वह इस मुद्दे से जुड़ी सभी याचिकाओं पर 17 दिसंबर को विस्तार से सुनवाई करेगी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह की दलीलों को ध्यानपूर्वक सुना।
सुनवाई के दौरान सीजेआई ने कहा कि अदालत इस समस्या की गंभीरता से पूरी तरह अवगत है और ऐसे व्यावहारिक आदेश पारित किए जाएंगे, जिनका वास्तविक स्तर पर पालन सुनिश्चित हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ निर्देश ऐसे होंगे जिन्हें सख्ती से लागू कराया जा सकता है। अदालत ने इस बात पर चिंता जताई कि महानगरों में रहने वाले लोग अपनी जीवनशैली में बदलाव करने को तैयार नहीं होते, भले ही प्रदूषण जानलेवा स्तर पर पहुंच जाए। लेकिन इसका सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब तबके को भुगतना पड़ता है, जिनके पास खुद को प्रदूषण से बचाने के पर्याप्त साधन नहीं हैं।
स्कूलों की बाहरी गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट की कड़ी नाराजगी
सुनवाई के दौरान बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े एक आवेदन का उल्लेख किया गया, जिसमें बताया गया कि अदालत के पूर्व आदेशों के बावजूद कई स्कूल अब भी बाहरी खेल गतिविधियों का आयोजन कर रहे हैं। इस पर एमिकस क्यूरी अपराजिता सिंह ने कहा कि जब तक अदालत स्पष्ट और सख्त निर्देश नहीं देती, तब तक संबंधित अधिकारी मौजूदा नियमों और प्रोटोकॉल का पालन सुनिश्चित नहीं कराते।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने चिंता जताते हुए कहा कि स्थिति अत्यंत गंभीर है और इसका सबसे ज्यादा असर गरीब मजदूरों और निम्न आय वर्ग के लोगों पर पड़ रहा है, जो प्रदूषण से बचाव के लिए न तो मास्क खरीद सकते हैं और न ही घर के भीतर सुरक्षित रहने का विकल्प उनके पास होता है।
दिल्ली धुंध की चपेट में, AQI खतरनाक स्तर पर
सोमवार को दिल्ली घनी और जहरीली धुंध की मोटी परत में लिपटी रही। राजधानी का एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 498 तक दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। अदालत ने पहले ही साफ कर दिया था कि वह इस मुद्दे पर मूकदर्शक बनकर नहीं बैठ सकती। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) को निर्देश दिए थे कि वह बार-बार उत्पन्न होने वाले प्रदूषण संकट पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करे और केवल पराली जलाने को ही जिम्मेदार ठहराने की प्रवृत्ति से बचा जाए।
खराब हवा के चलते हाइब्रिड सुनवाई की सलाह
दिल्ली में खराब होती वायु गुणवत्ता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बार के सदस्यों और आम नागरिकों से अपील की है कि जहां संभव हो, वहां हाइब्रिड मोड के जरिए अदालत में पेश हों। सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री ने मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर एक सर्कुलर जारी कर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के अधिकतम उपयोग की सलाह दी है। अदालत ने दोहराया कि हर साल केवल तात्कालिक उपाय करने के बजाय दीर्घकालिक और स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
दिल्ली-एनसीआर में जहरीली हवा से जनजीवन अस्त-व्यस्त
दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण इस कदर बढ़ गया है कि आम जनजीवन पर सीधा खतरा मंडरा रहा है। राजधानी का AQI 500 के पार पहुंच चुका है। नोएडा और गाजियाबाद में कक्षा पांच तक के छात्रों के लिए स्कूल बंद कर दिए गए हैं और पढ़ाई पूरी तरह ऑनलाइन कर दी गई है। वहीं, दिल्ली में 10वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को स्कूल आने की अनुमति दी गई है, जबकि बाकी कक्षाओं के लिए हाइब्रिड पढ़ाई व्यवस्था लागू की गई है।
छात्रों और आम लोगों के लिए मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया गया है। सरकारी दिशा-निर्देशों के तहत 50 प्रतिशत कर्मचारियों को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा दी गई है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें और प्रदूषण से बचाव के सभी उपाय अपनाएं।
धुंध का असर: सड़क, रेल और हवाई यातायात प्रभावित
राजधानी की सड़कों पर धुंध इतनी घनी है कि वाहन चालकों की दृश्यता कुछ ही मीटर तक सीमित हो गई है। एक्सप्रेस-वे और प्रमुख मार्गों पर वाहन फॉग लाइट के सहारे बेहद धीमी गति से चल रहे हैं। इस घने कोहरे और प्रदूषण के कारण ट्रेन और फ्लाइट सेवाओं में भी भारी देरी देखने को मिल रही है। रेलवे स्टेशनों और एयरपोर्ट पर यात्री लंबी कतारों में परेशान नजर आ रहे हैं और कई लोगों को अपनी यात्रा स्थगित करनी पड़ रही है।
लोगों को सांस लेने में दिक्कत, खांसी, आंखों में जलन और गले में खराश जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और लंबे समय तक ऐसे हालात बने रहने से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
प्रदूषण का दायरा दिल्ली से बाहर भी फैला
प्रदूषण अब केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा है। नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर और हापुड़ में भी AQI खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है। बुलंदशहर में AQI 581 दर्ज किया गया, जबकि हापुड़ में घने कोहरे के कारण हाईवे पर कई सड़क हादसे सामने आए। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में AQI लगभग 400 के आसपास बना हुआ है।
घने कोहरे और जहरीली धुंध ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा हालात स्वास्थ्य के लिए अत्यंत खतरनाक हैं और आने वाले दिनों में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण हो सकती है।
ग्रैप-4 लागू होने के बाद दिल्ली सरकार ने छात्रों के लिए हाइब्रिड शिक्षा व्यवस्था अपनाई है और आम जनता को घरों में रहने तथा प्रदूषण से बचाव के उपाय करने की सलाह दी है। फिलहाल राजधानी और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण और घने कोहरे का संकट बरकरार है, जो आने वाले दिनों में और गहरा सकता है।
भावना सिंह, प्रोड्यूसर