डेली24 भारत डेस्क: भारतीय डिजिटल पेमेंट सिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है और इसी क्रम में भारतीय रिजर्व बैंक ने UPI ऑटो-डेबिट और ई-मैंडेट से जुड़े नियमों में अहम बदलाव किए हैं. ये नए नियम खासतौर पर उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हैं, जिनके बैंक अकाउंट से हर महीने OTT सब्सक्रिप्शन, बिजली बिल, इंश्योरेंस प्रीमियम, SIP या अन्य सेवाओं के लिए ऑटोमैटिक पेमेंट कटती है. इन बदलावों का उद्देश्य पेमेंट प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित बनाना है, ताकि यूजर्स के पैसे पर उनका बेहतर नियंत्रण बना रहे.
नए नियमों के अनुसार, अब ₹15,000 तक की रिकरिंग पेमेंट बिना किसी OTP या अतिरिक्त सत्यापन के अपने आप प्रोसेस हो जाएगी. इसका मतलब है कि छोटे और नियमित खर्चों के लिए यूजर्स को बार-बार हस्तक्षेप करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. लेकिन जैसे ही भुगतान राशि ₹15,000 से अधिक होगी, बैंक या पेमेंट सिस्टम आपसे अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन यानी OTP या अन्य वेरिफिकेशन मांगेगा. इससे बड़े ट्रांजैक्शन में सुरक्षा की एक अतिरिक्त परत जुड़ जाएगी.
ये नियम सिर्फ UPI ऑटो-पे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और प्रीपेड वॉलेट जैसे सभी पेमेंट इंस्ट्रूमेंट्स पर लागू होंगे. यानी चाहे आप किसी भी माध्यम से ऑटो-डेबिट सेट करें, आपको इन नए दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा. हालांकि, RBI ने कुछ जरूरी पेमेंट्स के लिए राहत भी दी है. इंश्योरेंस प्रीमियम, म्यूचुअल फंड SIP और क्रेडिट कार्ड बिल जैसे मामलों में ₹15,000 से लेकर ₹1 लाख तक के ट्रांजैक्शन बिना OTP के प्रोसेस किए जा सकते हैं, बशर्ते कुछ तय शर्तों को पूरा किया गया हो. इससे जरूरी वित्तीय दायित्वों में रुकावट नहीं आएगी और सुविधा भी बनी रहेगी.
ई-मैंडेट सेट करते समय भी अब एक बार अतिरिक्त ऑथेंटिकेशन अनिवार्य कर दिया गया है. यानी जब आप पहली बार किसी सेवा के लिए ऑटो-पे शुरू करेंगे, तो आपको अपनी पहचान सत्यापित करनी होगी. इतना ही नहीं, पहला ट्रांजैक्शन भी ऑथेंटिकेशन के बाद ही पूरा होगा. इससे सिस्टम में शुरुआत से ही सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी. एक और महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि अब हर रिकरिंग पेमेंट से कम से कम 24 घंटे पहले आपको एक अलर्ट मिलेगा. इस नोटिफिकेशन में मर्चेंट का नाम, भुगतान राशि और डेबिट की तारीख जैसी पूरी जानकारी होगी. इससे यूजर्स को यह तय करने का मौका मिलेगा कि वे पेमेंट जारी रखना चाहते हैं या उसे कैंसिल करना चाहते हैं. अगर कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन हो, तो उसे समय रहते रोका जा सकता है.
पेमेंट कटने के बाद भी यूजर को तुरंत कन्फर्मेशन अलर्ट मिलेगा, जिसमें ट्रांजैक्शन की पूरी जानकारी और शिकायत दर्ज करने का तरीका शामिल होगा. इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और यूजर्स अपने सभी ऑटो-डेबिट ट्रांजैक्शन पर नजर रख सकेंगे. अब यूजर्स को ई-मैंडेट पर पहले से ज्यादा नियंत्रण भी दिया गया है. वे फिक्स्ड या वैरिएबल अमाउंट का मैंडेट सेट कर सकते हैं और वैरिएबल मामलों में अधिकतम सीमा खुद तय कर सकते हैं. अगर यूजर मैंडेट में कोई बदलाव करना चाहता है, जैसे राशि, तारीख या वैधता अवधि तो उसे फिर से ऑथेंटिकेशन करना होगा. साथ ही, यूजर किसी भी समय मैंडेट को रद्द भी कर सकता है.
इसके अलावा, अगर आपका डेबिट या क्रेडिट कार्ड बदल जाता है या एक्सपायर होकर नया जारी होता है, तो पहले से सक्रिय ऑटो-डेबिट मैंडेट नए कार्ड पर ट्रांसफर किए जा सकते हैं. इससे आपकी सेवाएं बिना रुकावट जारी रहेंगी. सबसे अच्छी बात यह है कि ई-मैंडेट सुविधा के लिए बैंक कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं ले सकते. RBI ने साफ निर्देश दिए हैं कि इस सेवा का उपयोग पूरी तरह मुफ्त रहेगा. साथ ही, अगर कोई अनधिकृत ट्रांजैक्शन होता है और ग्राहक समय पर शिकायत दर्ज करता है, तो उसे सुरक्षा भी मिलेगी.
ये नए नियम डिजिटल पेमेंट को न सिर्फ आसान बनाते हैं, बल्कि पहले से ज्यादा सुरक्षित भी करते हैं. यूजर्स को अब अपने पैसों पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है. कुल मिलाकर, यह कदम डिजिटल इंडिया को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर