डेली24 भारत डेस्क: झारखंड से दिल्ली जा रहा एक एयर एंबुलेंस विमान सोमवार शाम दर्दनाक हादसे का शिकार हो गया. रांची से उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद रेडबर्ड कंपनी का बीचक्राफ्ट किंग एयर B90L विमान चतरा जिले के समरिया जंगल क्षेत्र में दुर्घटनाग्रस्त हो गया. इस हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौत हो गई. यह घटना न केवल झारखंड बल्कि पूरे देश के लिए गहरे शोक और चिंता का विषय बन गई है.
डायरेक्टरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन के अनुसार विमान ने सोमवार शाम करीब 7:10 बजे रांची एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरी थी. लगभग 7:30 बजे पायलट ने खराब मौसम के कारण मार्ग बदलने की अनुमति मांगी. इसके तुरंत बाद विमान का संपर्क कोलकाता एयर ट्रैफिक कंट्रोल से टूट गया और रडार से भी सिग्नल गायब हो गया. कुछ ही देर बाद यह स्पष्ट हो गया की विमान झारखंड के चतरा जिले के समरिया के जंगलों में क्रैश हो गया है.
हादसे का शिकार हुआ विमान रेडबर्ड कंपनी का बीचक्राफ्ट किंग एयर B90L था, जिसे एयर एंबुलेंस के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा था. इस विमान में कुल सात लोग सवार थे. इनमें कैप्टन विवेक विकास भगत (पायलट), कैप्टन सबराजदीप सिंह (को-पायलट), संजय कुमार (मरीज), अर्चना देवी (परिजन), धूरू कुमार (परिजन), विकास कुमार गुप्ता (डॉक्टर) और सचिन कुमार मिश्रा (पैरामेडिकल स्टाफ) शामिल थे. हादसे में सभी की मौके पर ही मौत हो गई.
जानकारी के अनुसार 41 वर्षीय संजय कुमार, जो लातेहार जिले के चंदवा के रहने वाले थे, 16 फरवरी को 65 प्रतिशत जलने की हालत में रांची के देवकमल हॉस्पिटल में भर्ती कराए गए थे. अस्पताल के सीईओ ने बताया की मरीज की हालत गंभीर थी और परिवार ने बेहतर इलाज के लिए उन्हें दिल्ली ले जाने का फैसला किया था. एयर एंबुलेंस की व्यवस्था परिवार की ओर से की गई थी.
सोमवार शाम करीब 4:30 बजे संजय कुमार को अस्पताल से एयरपोर्ट ले जाया गया. सभी जरूरी मेडिकल उपकरणों और स्टाफ के साथ विमान ने तय समय पर उड़ान भरी. लेकिन उड़ान भरने के करीब 20 मिनट बाद ही स्थिति बिगड़ गई. खराब मौसम की सूचना के बाद पायलट ने डायवर्जन की अनुमति मांगी थी, जिससे यह अंदेशा जताया जा रहा है कि मौसम इस हादसे की एक बड़ी वजह हो सकता है. हालांकि, दुर्घटना के वास्तविक कारणों का पता विस्तृत जांच के बाद ही चल पाएगा.
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत दल मौके पर पहुंच गए. घने जंगल और अंधेरा होने के कारण राहत और बचाव कार्य में काफी दिक्कतें आई. दुर्घटनास्थल पर मलबा बिखरा हुआ था और विमान पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका था. अधिकारियों ने सभी सात शवों को बरामद कर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया.
इस हादसे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं की क्या मौसम की स्थिति का सही आकलन किया गया था? क्या तकनीकी खराबी भी इसकी वजह हो सकती है? DGCA ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और ब्लैक बॉक्स तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जाएगा.
एक मरीज, जो बेहतर इलाज की उम्मीद में दिल्ली ले जाया जा रहा था, रास्ते में ही जिंदगी की जंग हार गया. उसके साथ जीवन बचाने निकले डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ और दो अनुभवी पायलट भी इस हादसे का शिकार हो गए. यह घटना न केवल विमानन सुरक्षा पर गंभीर सवाल उठाती है, बल्कि उन परिवारों के लिए असहनीय दुख भी लेकर आई है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को एक ही पल में खो दिया.
यह हादसा हमें याद दिलाता है कि जीवन कितना अनिश्चित है और सुरक्षा मानकों की कितनी अहम भूमिका होती है. अब पूरे देश की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है, ताकि इस त्रासदी के पीछे की सच्चाई सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके.
खुशी डैंग, प्रोड्यूसर